जालंधर (कशिश): Jalandhar में अवैध लॉटरी और सट्टे का कारोबार नए तरीके से फैलता जा रहा है। पहले जहां लोग दुकानों पर जाकर पर्ची लगाते थे, अब पूरा खेल मोबाइल फोन और WhatsApp के जरिए संचालित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है, लेकिन इसका नेटवर्क तोड़ना पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार कुछ युवक, जो खुद को बेरोजगार बताते हैं, वास्तव में इस ऑनलाइन लॉटरी नेटवर्क में बिचौलियों की भूमिका निभा रहे हैं। ये लोग लॉटरी खेलने वालों से संपर्क कर उनसे WhatsApp पर ही पर्ची मंगवाते हैं और फिर यह जानकारी अवैध लॉटरी माफिया तक पहुंचा देते हैं। बताया जा रहा है कि इस काम के बदले ये बिचौलिए करीब 20 प्रतिशत कमीशन कमा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक रोजाना करीब 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की पर्चियां इकट्ठी की जा रही हैं। यदि प्रतिदिन 1 लाख रुपये की लॉटरी लगती है तो 20 प्रतिशत के हिसाब से लगभग 20 हजार रुपये रोज की कमाई होती है, जो महीने में करीब 6 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि खुद को बेरोजगार बताने वाले ये लोग बिना किसी वैध रोजगार के आरामदायक जीवन जी रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आ रही है कि इस तरह के खुद को बेरोजगार बताने वाले लोगों की संख्या शहर में हजारों में बताई जा रही है। यदि यह आंकड़ा सही है तो यह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था के लिए भी चिंताजनक संकेत है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी चैट और डिजिटल लेन-देन के कारण इस अवैध कारोबार को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। हालांकि पुलिस समय-समय पर कार्रवाई के दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह नेटवर्क अभी भी सक्रिय बताया जा रहा है।
शहर में तेजी से फैल रहा यह अवैध धंधा न केवल कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि युवाओं को भी आसान और गलत तरीके से पैसा कमाने की ओर आकर्षित कर रहा है। नागरिकों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।




