जालंधर (शर्मा): पंजाब और हरियाणा में सट्टेबाजी के मामलों में अब तक हजारों की संख्या में बुकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, लेकिन इन मामलों की जड़ माने जाने वाले सॉफ्टवेयर और उसके कथित डेवलपर तक पुलिस आज भी नहीं पहुंच सकी है। बस्तीयात क्षेत्र का रहने वाला संदीप नामक व्यक्ति खुद को सॉफ्टवेयर डेवलपर बताता है, जिस पर आरोप है कि उसने करीब 15–16 साल पहले ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया, जिसका इस्तेमाल मैच सट्टेबाजी से जुड़े बुकी कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक यह सॉफ्टवेयर किसी सामाजिक या व्यावसायिक कार्य के लिए नहीं, बल्कि सट्टेबाजों के नेटवर्क को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस सॉफ्टवेयर के जरिए बुकियों की हार-जीत, पंटर द्वारा लगाए गए पैसों का पूरा हिसाब-किताब डिजिटल रूप में दर्ज किया जाता है। सट्टा कारोबार में इसे “सीबीएम” या “जेड अकाउंट” के नाम से जाना जाता है।
आरोप है कि उक्त व्यक्ति हर साल इस सॉफ्टवेयर को अपडेट करने के नाम पर हजारों रुपये वसूलता रहा है और वर्तमान में पंजाब व हरियाणा के हजारों बुकी उसके संपर्क में बताए जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि जब पुलिस ने सट्टेबाजी के मामलों में बुकियों को गिरफ्तार किया, तब उनके लैपटॉप और डिजिटल डेटा की गहन जांच में यह सवाल गंभीरता से नहीं उठाया गया कि इस पूरे सिस्टम को विकसित करने वाला व्यक्ति कौन है।
इस पूरे मामले का खुलासा पंजाब केसरी के एक क्राइम पत्रकार द्वारा अपनी रिपोर्ट में किया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर अपना मोबाइल नंबर बंद कर दिया और विदेश जाने की कोशिशों में जुट गया। यही नहीं, सूत्रों का दावा है कि पत्रकार को धमकाने के प्रयास भी किए गए, हालांकि निडर पत्रकार अपने स्टैंड पर डटा रहा और उसने शहर में चल रही अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों को भी उजागर किया।
अब सवाल यह उठता है कि जब पुलिस प्रशासन सट्टेबाजी के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है, तो फिर इस कथित सॉफ्टवेयर डेवलपर के खिलाफ जांच और कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। क्या पुलिस इस डिजिटल नेटवर्क की जड़ तक पहुंचेगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा—यह देखने वाली बात होगी।
इस खबर के बाद अब निगाहें पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या वह सट्टेबाजी के इस कथित डिजिटल मास्टरमाइंड तक पहुंच पाती है या नहीं।




