जालंधर (शर्मा): जालंधर के डिवीजन नंबर-3 की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नशा तस्करी और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में लिप्त वे लोग, जिन पर अलग-अलग थानों में तीन-चार आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनसे डिवीजन नंबर-3 के मुलाजिमों की नियमित मुलाकातें हो रही हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ये मुलाकातें अक्सर भगत सिंह चौक के पास पार्किंग क्षेत्र में होती हैं। हैरानी की बात यह है कि इन संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ करने या कोई सख्त कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस मुलाजिम उनसे बातचीत कर वापस लौट जाते हैं। बताया जा रहा है कि इन लोगों को रोज़ाना तीन-चार बार पुलिस की ओर से फोन भी आते हैं, जो कई सवाल खड़े करता है।सूत्र बताते हैं कि इसी स्थान पर लंबे समय से जुए जैसी गैर-कानूनी गतिविधियां चल रही हैं।

जब भी कोई पुलिस मुलाजिम वहां पहुंचता है, तो कथित रूप से जुआ खेलने वालों को साइड में ले जाकर बातचीत की जाती है और उसके बाद जुआ दोबारा शुरू हो जाता है।यह स्थिति समझ से परे है कि यदि पुलिस प्रशासन को कार्रवाई नहीं करनी, तो फिर वहां बार-बार पहुंचने और फोन पर संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां वर्षों से इसी तरह चल रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। अब सवाल यह उठता है कि “दाल में क्या काला है?” इसका जवाब तो संबंधित मुलाजिम ही दे सकते हैं। वहीं, आम जनता यह मांग कर रही है कि पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर स्पष्ट करे कि आखिर भगत सिंह चौक पर हो रही इन ‘मुलाकातों’ का मकसद क्या है और अगर कोई कुछ दाला में काला है तो क्या बड़े अधिकारी इम मुलाजिमों के मोबाइल नम्बर चैक करवा पाएंगे या फिर बड़े अधिकारियों को भी इनके बारे में खबर रहती है।




