जालंधर में 9 बजे के बाद कानून बेख़बर, अपराध बेख़ौफ़

JALANDHAR Punjab

जालंधर (स्पैशल स्टोरी) जालंधर शहर में रात 9 बजते ही ऐसा लगता है मानो पुलिस व्यवस्था भी सोने चली जाती है। सड़कों पर जनता की सुरक्षा के लिए पुलिस की मौजूदगी न के बराबर है, जबकि अपराधी बेख़ौफ़ होकर गोलियां चला रहे हैं, लूटपाट और चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

शहर के हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि रात के समय लोग घरों से निकलने से डरने लगे हैं। कभी रौनक से गुलज़ार रहने वाले चौक-चौराहे 9 बजे के बाद वीरान नज़र आते हैं। सवाल यह है कि जब जनता घरों में दुबकने को मजबूर है, तब पुलिस प्रशासन आखिर किस सुरक्षा का दावा कर रहा है?

हकीकत यह है कि हर चौक पर सिर्फ एक ही पुलिस गाड़ी दिखाई देती है। वह भी सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि दो मिनट के फोटो सेशन के लिए। एक गाड़ी रोकी जाती है, वीडियो बनाई जाती है और उसके तुरंत बाद वही टीम अगले चौक की ओर रवाना हो जाती है। इसी तरह पूरे शहर में “नाके का नाटक” खेला जा रहा है।

सवाल यह उठता है कि
क्या यह फोटो और वीडियो बड़े अधिकारियों को दिखाने के लिए बनाए जा रहे हैं?
क्या ज़मीनी हकीकत से दूर बैठकर अफसरों को सब कुछ ठीक होने का झूठा संदेश दिया जा रहा है?

हैरानी की बात यह भी है कि पुलिस की तथाकथित “स्पैशल चैकिंग” सिर्फ आधी रात 12 बजे से 3 बजे के बीच रेलवे स्टेशन तक सीमित रहती है। वह भी अपराध रोकने के लिए नहीं, बल्कि चालान काटने की औपचारिकता निभाने के लिए। संवेदनशील इलाकों, मोहल्लों और आंतरिक सड़कों पर न तो स्थायी नाके हैं और न ही पैदल गश्त।

दिन हो या रात, जालंधर की जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। भरोसा टूट रहा है और डर बढ़ता जा रहा है।
क्या पुलिस की जिम्मेदारी अब सिर्फ कैमरे के सामने दिखावा करने तक सीमित रह गई है?
क्या अपराधियों के डर से शहर को यूं ही अंधेरे के हवाले छोड़ दिया जाएगा?

अगर यही हालात रहे, तो कानून व्यवस्था पर जनता का विश्वास पूरी तरह टूट जाएगा। जालंधर की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, सड़कों पर पुलिस और ज़मीनी सुरक्षा चाहती है।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *