जालंधर (साबी): जालंधर में लैदर कॉम्प्लेक्स के समीप स्थित रिहायशी इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर घरों को ही कमर्शियल बिल्डिंग में तब्दील कर फैक्टरियों का रूप दे दिया गया है। इन अवैध रूप से संचालित इकाइयों के चलते स्थानीय लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
रिहायशी इलाकों में चल रही इन फैक्टरियों से निकलने वाला जहरीला धुआं और कैमिकल लोगों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ कर रहा है। दिन-रात आसमान में फैला काला धुआं सांस लेना मुश्किल बना रहा है, जबकि सड़कों पर बहते कैमिकल और सीवरेज का गंदा पानी नहरों में जाकर पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि कई वर्षों से लगातार बनी हुई है। इसके बावजूद न तो प्रदूषण विभाग की ओर से कोई प्रभावी जांच की गई और न ही नगर निगम या प्रशासन ने सख्त कदम उठाए। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन को इस गंभीर समस्या की जानकारी ही नहीं है या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
इलाके के निवासियों ने मांग की है कि रिहायशी क्षेत्रों में चल रही अवैध फैक्टरियों को तुरंत बंद कराया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि लोगों को स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित जीवन मिल सके।




