जालंधर देहात पुलिस ने बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। थाना सदर नकोदर के अंतर्गत उगी चौकी के इंचार्ज अंग्रेज सिंह ने नाके के दौरान एक इनोवा गाड़ी को रोका, जिसमें मौजूद कुछ लोग एक बच्चे के साथ संदिग्ध हालात में पाए गए। पूछताछ और जांच के बाद मामला बेहद चौंकाने वाला निकला।
डीएसपी सब-डिवीजन नकोदर सुखपाल सिंह के मुताबिक अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 2 फरार आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस ने आरोपियों पर आपराधिक केस दर्ज करके आगे की कार्रवाई तेज कर दी है।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह गरीब मां-बाप से बेहद कम रकम देकर बच्चों को खरीदता और फिर जरूरतमंद दंपतियों को लाखों में बेच देता था। पुलिस ने लुधियाना मंजीत नगर के जगजीत सिंह और उसकी मां रंजीत कौर, इसके अलावा अमरजीत कौर निवासी गांव कलां (लुधियाना) को पकड़ा है। ये लोग मोगा क्षेत्र से एक बच्चा खरीदकर उसे जालंधर में ऊंची कीमत पर बेचने जा रहे थे। बताया गया कि 4 लाख रुपए में सौदा तय किया गया था।
पुलिस ने बताया कि आरोपी बलजीत सिंह बच्चे का असली पिता है। उसने अपनी पत्नी को यह कहकर धोखा दिया कि बच्चा जन्म के बाद मर गया है और फिर उसे बेचने की साजिश रच ली।
इसी सिलसिले में आशा वर्कर रजनी और मोगा अदालत में कार्यरत गगनदीप नामक महिला की भी भूमिका सामने आई है। जांच में पता चला है कि यह दोनों आरोपी कुलविंदर कौर उर्फ मनी से जुड़े हुए थे। बच्चे को बेचने के बदले में इन लोगों के बीच पैसों का लेन-देन हुआ था।
इसके अलावा मनप्रीत निवासी लुधियाना और शमशेर निवासी बठिंडा अभी फरार हैं। आरोप है कि मनप्रीत व उसकी पत्नी दिलजीत पहले भी एक बच्ची को रंजीत कौर को बेच चुके हैं।
मामले में एक और नाम सामने आया है — रीना। यह महिला एक आईवीएफ सेंटर से जुड़ी बताई जाती है और वहीं से ऐसे दंपतियों को खोजती थी जिनके बच्चे नहीं होते, फिर इस गैंग के जरिए अवैध सौदा कराती थी। पुलिस के मुताबिक दोनों फरार महिलाओं की तलाश में दबिश दी जा रही है और उनकी गिरफ्तारी किसी भी समय हो सकती है।
डीएसपी ने बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद 3 दिन का पुलिस रिमांड मिला है, जिसके दौरान और भी सनसनीखेज खुलासे होने की उम्मीद है।
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