ग्रैंड मॉल में विदेश भेजने के नाम पर हंगामा, पीड़ितों ने एजेंसी पर लाखों रुपये ठगने का लगाया आरोप

JALANDHAR Punjab

जालंधर (साबी): शहर के ग्रैंड मॉल स्थित एक विदेश यात्रा कंसल्टेंसी कार्यालय के बाहर गुरुवार को उस समय हंगामा हो गया, जब विदेश भेजने के नाम पर रुपये देने वाले कई लोग अपनी शिकायत लेकर वहां पहुंच गए। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

पीड़ितों का आरोप है कि पहले ग्रैंड मॉल की पांचवीं मंजिल पर संचालित कार्यालय बंद कर दिया गया और बाद में कंपनी का नाम बदलकर सामान चौथी मंजिल स्थित कार्यालय में शिफ्ट कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, चौथी मंजिल पर उन्हें कंपनी का मैनेजर पंकज मिला, जिसने उनकी शिकायत सुनने के बजाय कथित तौर पर उन्हें थाने में देख लेने की धमकी दी और पुलिस के पहुंचने से पहले वहां से चला गया।

होशियारपुर निवासी रीना ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कंपनी के कर्मचारियों से संपर्क किया था। उन्हें गढ़ा रोड स्थित कार्यालय बुलाया गया, जहां मलेशिया भेजने का भरोसा देते हुए पहले एक लाख रुपये जमा करवाने और शेष राशि वीजा मिलने के बाद देने की बात कही गई।

रीना के अनुसार, 18 मई को उन्होंने ग्रैंड मॉल की पांचवीं मंजिल स्थित कार्यालय में स्टाफ सदस्य नीतिका को एक लाख रुपये दिए। उन्हें 14 जून तक वीजा मिलने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन तय समय से पहले और बाद में कई बार संपर्क करने के बावजूद न तो फोन उठाया गया और न ही कोई संतोषजनक जवाब मिला।

पीड़िता का आरोप है कि उन्हें कंपनी के संचालक ईशव भारद्वाज का संपर्क नंबर भी उपलब्ध नहीं कराया गया। 19 जून को जब वह गढ़ा रोड स्थित कार्यालय पहुंचीं तो वह बंद मिला। इसके बाद ग्रैंड मॉल पहुंचने पर पता चला कि कार्यालय वहां से भी हटाया जा चुका है। बाद में जानकारी मिली कि कंपनी ने चौथी मंजिल पर नया कार्यालय शुरू कर दिया है।

रीना का कहना है कि वह अपने परिजनों के साथ चौथी मंजिल स्थित कार्यालय पहुंचीं, जहां उन्हें मैनेजर पंकज मिला। उन्होंने दावा किया कि कार्यालय किसी अन्य व्यक्ति का है। पीड़िता के अनुसार, स्टाफ बदल दिया गया था, हालांकि वहां सफाई करने वाली महिला पहले वाली ही थी।

रीना ने बताया कि उन्होंने संबंधित थाना पुलिस को शिकायत भी दी है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका दावा है कि उनके अलावा कम से कम छह अन्य लोगों ने भी मलेशिया भेजने के नाम पर एक-एक लाख रुपये जमा कराए हैं, लेकिन किसी को भी वीजा नहीं मिला।

मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को शांत कराया। वहीं, पीड़ितों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा उनकी राशि वापस दिलाने की मांग की है।

नोट: इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले में संबंधित एजेंसी या ईशव भारद्वाज का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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